शोक, चिंता, दुःख, तनाव,अवसाद ये ऐसे मिलते जुलते शब्द हैं जो अक्सर सामान्य व्यक्ति को एक जैसे ही प्रतीत होते हैं पर वास्तव में ऐसा है नहीं। इन शब्दों की प्रकृति अलग अलग है। इसी प्रकार जीवन में अलग अलग शब्दों का प्रभाव और इनकी व्याख्या भी अलग अलग है। आज हम अवसाद पर चर्चा करने वाले हैं कि किसी व्यक्ति को ये क्यों होता है और इससे बचाने के लिए हमे क्या करना चाहिए?
अवसाद क्या है?
अवसाद शब्द का प्रयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति में किन्ही भी गतिविधियों में दिलचस्पी न लेना या आनंद का अभाव और निरुत्साही मनोदशा होती है। यह तब एक विकार बन जाता है जब वह इतना तीव्र हो जाता है कि कार्यकलापों में स्वयं ही हस्तक्षेप जैसा कुछ होने लगता है। यह कई सप्ताह या महीनों तक बना रह सकता है। अक्सर कम तीव्रता का अवसाद समय और परिस्थिति के साथ शांत भी हो सकता है पर कभी कभी तीव्रता बढ़ जाने से यह आत्महत्या के विचार तक पहुंच जाता है।
अवसाद भावनात्मक रूप से कष्टप्रद घटनाओं जैसे परिवार मे किसी की मृत्यु, किसी की गंभीर बीमारी, कोई प्राकृतिक आपदा, किसी के द्वारा अपमानित महसूस किया जाना , कोई ऐसी घटना जो आपकी मर्ज़ी के खिलाफ घटित हो गई हो। मौसम के बदलाव आदि के कारण किसी के मन पर असर डालने को लेकर होता है और कभी कभी परिस्थितियों के अपने अनुकूल हो जाने पर धीरे धीरे ठीक होने की स्थिति में भी होता है। पर यह बढ़ जाय तो समस्या गंभीर भी हो सकती है।
अवसाद के कारण
अवसाद के एकदम सटीक कारण की व्याख्या नहीं की जा सकती परंतु ऐसे अनेक कारक हैं जो अवसाद की संभावना को बढ़ा देते हैं जिनमे ये निम्न कारक संभव हो सकते हैं....
*भावनात्मक रूप से कष्टप्रद घटनाएं
*किसी प्रियजन की बीमारी या मृत्यु
*किसी घटना में खुद को अपराधबोध से ग्रस्त कर लेना
*मौसम में बदलाव
*कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट्स
*आनुवांशिकता
*गर्भावस्था, बच्चे के जन्म या राजोनवृत्ति के बाद
*असामान्य थायराइड
*गंभीर बीमारी से पीड़ित होना
भावनात्मक रूप से कष्टप्रद घटनाएं
जीवन में अनेक बार ऐसी घटनाएं घटित हो जाया करती हैं जो सीधे किसी व्यक्ति के मन मस्तिष्क और हृदय को प्रभावित करती हैं। इसकी वजह से अनेक बार कई मानसिक स्वास्थ्य विकार उत्पन्न हो जाया करते हैं जो व्यक्ति में अवसाद होने की संभावना को बढ़ा देते हैं।
जैसे किसी को लंबे समय तक प्रताड़ित किया जाना, ब्लैक मेल किया जाना, उपेक्षा का शिकार होना, तिरस्कार किया जाना , घर के किसी व्यक्ति से दुराव करके उसे अकेले छोड़ दिया जाना।
किसी प्रियजन की बीमारी या मृत्यु
परिवार में या अन्य किसी प्रिय निकटस्थ की मृत्यु होने पर व्यक्ति सदमे में पहुंच जाता है। कोई अति संवदेनशील व्यक्ति लंबे समय तक जब एक ही स्थिति में बना रहता है तो उसके मन मस्तिष्क और हृदय में एक प्रकार का विकार उत्पन्न होने लग जाता है। व्यक्ति निरुत्साह महसूस करता है। उसका मन किसी कार्य में नहीं लगता है। उसके अंदर की भावनाएं समुद्र की लहरों की तरह उठती और गिरती रहती हैं। इस प्रकार से कभी कभी व्यक्ति डीप डिप्रेशन में चला जाता है।
किसी घटना में खुद को अपराधबोध से ग्रस्त कर लेना
कुछ अति संवेदनशील व्यक्ति गलत न होते हुए भी कभी कभी खुद को इस भावना से ग्रसित कर लेते हैं मानो सारी गलती की जड़ वे ही हैं। वे खुद को गलत मानकर इतना आगे तक सोच ले जाते हैं कि यदि उन्होंने ऐसा नहीं किया होता तो ये घटना नहीं होती। जबकि असली दोषी वे नहीं होते।
जानबूझ कर गलती करने वाला कभी अपराध बोध से ग्रस्त नही होता, क्योंकी गलती तो जान बूझ कर की गई होती है न? फिर वहां अपराधबोध की भावना जन्म ही कहां लेगी? इसलिए बेवजह की इस तरह की धारणा बनाने से बचना चाहिए। गलतियां इंसान से होती हैं यदि हो ही गई तो क्या जान दे देंगे?
मौसम में बदलाव
कई बार मौसम के बदलाव का सीधा असर खानपान और दिनचर्या पर पड़ता है। इस दिनचर्या के बदलाव का असर पतझड़ के अंत में और शीत ऋतु में कुछ लोगों में स्वभाव में परिर्वतन जैसे कुछ उदासी भरा या सुषुप्तावस्था जैसा हो सकता है। यह उस व्यक्ति के शरीर की प्रकृति पर आधारित हो सकता है। ऐसे लोगों में समय के साथ मौसम अनुकूल होने पर स्थिति सामान्य हो जाती है।
कुछ दवाओं का दुष्प्रभाव
लंबे समय तक कुछ दवाओं के लगातार सेवन करने से व्यक्ति के शरीर और मन पर इसका कुप्रभाव पड़ता है जिसकी वजह से भी व्यक्ति अवसाद का शिकार हो सकता है।
आनुवांशिकता
अवसाद से ग्रस्त बहुत से लोगों में आनुवंशिक कारकों का बहुत योगदान होता है। उदाहरण के लिए अवसाद वाले लोगों के बेहद करीबी रिश्तेदारों या परिजनों (खासकर जुड़वां बच्चों में ) अवसाद अधिक आम होता है। आनुवंशिक कारक ऐसे पदार्थों को प्रभावित करते हैं जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं।
गर्भावस्था, बचे के जन्म या राजोनिवृत्ति के बाद
उपरोक्त स्थितियों में अक्सर महिलाओं के अंदर बहुत से शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक परिवर्तन होते हैं। इन शारीरिक परिवर्तनों का महिलाओं की मनोदशा पर अलग अलग प्रभाव पड़ता है। सभी महिलाओं में नहीं किंतु कुछ महिलाओं में इस परिवर्तन की वजह से अवसाद का जन्म हो सकता है। हालांकि इस प्रकार का अवसाद समय के साथ बदली परिस्थितियों में सामान्य हो जाता है। किंतु यदि 9 महीने बाद बच्चे के जन्म के समय बच्चे की मृत्यु हो जाती है तो ये एक मां के मन को झकझोर देता है और महिला अवसाद ग्रस्त का शिकार हो सकती है जो लंबा खिंच सकता है।
असामान्य थायराइड
थायराइड का असामान्य (बढ़ना/घटना) होना किसी व्यक्ति के मूड को प्रभावित कर सकता है। थायराइड विकार हार्मोंस लेवल को प्रभावित करता है जो अवसाद को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।
गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति
किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति जब लंबे समय तक किसी मानसिक और शारीरिक पीड़ा में रहता है तो वह अवसाद का शिकार हो जाता है। शरीर के रुग्ण होने और साथ न देने से जीवन के प्रति उसके मन में उदासीनता आने लगती है। नकारात्मक विचार उसके ऊपर प्रभावी होने लगते हैं। किसी कार्य में उसका मन नहीं लगता है। अन्य लोगों को स्वस्थ देखकर उसके मन में भी जीने की चाह बढ़ती है पर वह इस अनिश्चितता में जी जी कर कि कहीं उसके जीवन में हमेशा के लिए अंधेरा न छा जाय, धीरे धीरे अवसाद में चला जाता है।
अवसाद की कैसे पहचान करें
*अवसाद के लक्षण आम तौर पर कई दिनों से लेकर कई सप्ताहों तक विकसित होते हैं, और विविध प्रकार के हो सकते हैं।
*अवसादी व्यक्ति सुस्त, उदास, चिड़चिड़ा और उग्र दिख सकता है।
*अवसादी व्यक्ति में कई ऐसे हो सकते हैं जिनमे खुशी, शोक और प्रसन्नता का अनुभव नहीं होता।
*अवसादी व्यक्ति आत्मग्लानि और आत्मनिंदा की तीव्र भावना से ग्रसित हो सकते हैं।
*अवसादी व्यक्ति अक्सर मायूसी, अकेलेपन, खुद की मूल्यहीनता और गिरे हुए आत्मविश्वास के साथ जीते रहते हैं।
*अवसादी व्यक्ति खींचे खींचे से अनिश्चितता की स्थिति में बने रहते हैं। वे लोगों से नजरें चुराते रहते हैं।
*अवसादी व्यक्ति अक्सर खुद को बिलकुल असहाय और निराश महसूस करते हैं। वे अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त करना नहीं चाहते, यदि बात भी करते हैं तो उनका लहजा नीरस भरा होता है।
*अवसादी व्यक्तियों की आंखों में नीद नहीं होती। बहुत बार रातें जाग कर कट जाया करती हैं। यही नहीं कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो डिप्रेशन की अवस्था में सामान्य से अधिक नीद लेते हैं।
*अवसादी व्यक्ति का ये विकार जब अपने चरम पर होता है तो वह बार बार मृत्यु और आत्म हत्या के बारे में सोचने लगता है। यह बहुत खराब स्थिति होती है।
*कुछ अवसादी महिलाओं में अवसाद विकार होने पर वे अचानक दुखी, अश्रुपूरित, चिड़चिड़ी, उदास, निराश, व्यग्र, तुनकमिजाज और क्रोधित हो जाया करती हैं।
आत्महत्या का विचार
अवसादी लोगों में मृत्यु का विचार अवसाद के सबसे गंभीर लक्षण होते हैं। डीप डिप्रेशन से पीड़ित कई लोगों में मरने का विचार सबसे ज्यादा आता है। उन्हे महसूस होता है की उनकी जिंदगी किसी काम की नहीं है, वे नकारा हैं, लोगों के ऊपर बोझ हैं, और इसलिए उनको मर जाना चाहिए। वे आत्महत्या की धमकी भी देते हैं। कुछ लोगों को जिनका उपचार नहीं मिल पाता वे ऐसा कदम उठा भी लेते हैं।
अवसाद से कैसे बचें और बचाएं
यह सबसे महतवपूर्ण विंदु है कि स्वयं को और अपने प्रियजनों, मित्रों को अवसाद ग्रस्त होने से कैसे बचाएं?
अवसाद की गंभीरता अलग अलग होती है और जरुरी नहीं की हर बार अवसादी व्यक्ति को डॉक्टर के पास ही ले जाया जाय। कई बार आपकी सजगता और आपका साथ उसे शीघ्र इस स्थिति से निकलने में मदद करता है।
अवसादी व्यक्ति की मदद करें
अधिकांश अवसाद ग्रस्त लोगों को अस्पताल में भर्ती करने या डॉक्टर को दिखाने की जरूरत नहीं पड़ती। केवल गंभीर अवसाद से ग्रस्त लोगों को इस तरह की चिकित्सा की जरूरत होती है खासकर तब, जब वे बार बार आत्महत्या की धमकी देने लग जाते हैं।
अवसादी व्यक्ति के साथ समय बताएं
बहुत मामले में आप उनके मददगार साबित हो सकते है
आपकी भूमिका उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। सर्वप्रथम हमे उनके अवसाद में चले जाने का कारण पता होना चाहिए। जब हम कारण जान जाते हैं तो हमे ऐसे लोगों की सहायता करने में भी आसानी होती है।
कुछ लोगों में अकेलेपन की वजह से डिप्रेशन होता है तो यहां यह जरूरी हो जाता है की ऐसे व्यक्ति को अकेले न रहने दिया जाय। डिप्रेस्ड व्यक्ति एकान्त भरी जिंदगी ज्यादा पसंद करता है किंतु हमारा पहला कार्य उनको अकेले नहीं छोड़ने का होना चाहिए। ध्यान रहे की अपने परिजनों या मित्रों के साथ हमारा साथ बने होना उन्हें संबल प्रदान करता है।
अवसादी व्यक्ति के मनोभावों को समझें
कुछ लोग ऐसे होते हैं जो परिवार या समाज में खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं। उन्हें लगता है कि कोई उनका सम्मान नही कर रहा है। ऐसे लोग अंतर्मुखी प्रकृति के हो सकते हैं। उनके लिए ऐसे लोगों से अधिक से अधिक बात किया जा सकता है जो डिप्रेस्ड व्यक्ति के करीबी हैं किंतु उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है की वास्तव में वह व्यक्ति इस समस्या से घिरा है। थोड़ा सा अतिरिक्त खयाल और अपनापन व्यक्ति में उत्साह और आनंद पैदा कर सकता है। इस तरह से उसके खोए अत्मविश्वास को वापस लाकर उसको शीघ्र ठीक किया जा सकता है।
संवाद करें
अवसाद से ग्रस्त व्यक्ति अति संवदेनशील होते हैं छोटी छोटी चीजें भी उन्हें तनाव और अवसाद की तरफ ले जाती हैं इसलिए उनके साथ संवाद स्थापित करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। उनके अंदर के विचार जानकर उनकी मनोदशा के अनुसार उनसे व्यवहार किया जाना अपेक्षित रहता है। ऐसे लोगों को संभव हो तो अपने साथ टहलने , घूमने फिरने, फिल्म देखने , संगीत सुनने, हंसी के गुबार छोड़ने जैसे कार्य किए जाएं तो धीरे धीरे उनमें सुधार आ जाता है और कुछ दिनों में वे सामान्य हो जपते हैं। पर यह प्रक्रिया बहुत धीमी होती है। इसमें धैर्य बनाए रखना जरूरी होता है।
मनोचिकित्सक की सहायता लें
एक मनोचिकित्सक हर तरह की बात करके डिप्रेशन वाले व्यक्ति का पूरा मानसिक ब्योरा जुटा लेता है। उसे यह एहसास हो जाता है कि संबंधित व्यक्ति किन कारणों से इस स्थिति में पहुंचा है। वह परिजनों या मित्रों को अवसादी व्यक्ति से किस तरीके से पेश आना है या कैसी बात करनी है इसका सलाह देता है। जिन समस्याओं की वजह से व्यक्ति इस स्थिति में पहुंचा है वे समस्याएं यदि समय रहते हल कर ली जाएं तो उपचार आसान होंजता है।
योग और ध्यान का अभ्यास करें
योग और ध्यान अवसाद खत्म करने में बहुत महतवपूर्ण भूमिका निभाता है। अक्सर अवसाद में व्यक्ति एकाग्रचित्त नहीं हो पाता है। भ्रामरी क्रिया, अनुलोम विलोम और ऊं का पूर्ण उच्चारण मस्तिष्क को शांत और स्थिर रखने में बहुत मदद करता है। इसके अतिरिक्त व्यायाम आपको शारीरिक रूप से सक्रिय रखता है और आपके जीवन में उमंग का संचार करता है। योग और एक्सरसाइज को यदि जीवन का महतवपूर्ण हिस्सा बना लिया जाय तो तनाव, चिंता, दुख, अवसाद आदि से बहुत हद तक बचा जा सकता है।
दवाओं का उपयोग
एंटीडिप्रेशन दवाइयां, डिप्रेशन को जल्द खत्म करने में मदद करती हैं, पर ये दवाइयां बिना डॉक्टर की सलाह के बिलकुल नहीं ली जानी चाहिए । इन दवाइयों की महत्वपूर्ण भूमिका यह होती है कि ये डिप्रेस्ड व्यक्ति को निराशा और हताशा भरी जिंदगी से शीघ्र उबरने में मददगार होती है।
इस तरह से यदि समय रहते हम यह समझने में कामयाब हो जाते हैं की किसी व्यक्ति की ऐसी स्थिति क्यों बनी है तो हमे उसका समाधान खोजने में आसानी होगी। फिर भी अंत में मैं यही कहूंगा कि ऐसे लोगों को उनके हाल पर बिल्कुल ना छोड़ा जाय, उनके साथ समय बिताया जाय, उनके विचारों को समझने के लिए उनसे संवाद करने का प्रयत्न किया जाय, उन्हें उनका सबल पक्ष याद दिलाया जाय और उनका खोया विश्वास वापस लाने में यदि उनकी मदद की जाय तो स्थित को गंभीर होने से बचाया जा सकता है।














Bilkul sahi kaha sir ji apane.
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