निराश होना एक ऐसी अवस्था है जहां आप स्वयं को बिलकुल बेचारा, कमजोर, असहाय और हताश समझने लग जाते हैं। एक हताश व्यक्ति कभी भी जीवन की कोई भी जंग नहीं जीत सकता। निराशा व्यक्ति में नकारात्मक भाव पैदा करती है। निराश होना स्वाभाविक है पर निराशा में डूबे रहना बीमारी है। ध्यान रहे हमारी जिंदगी हमेशा हमारे मन के मुताबिक नहीं चलती। जो हम चाहते हैं जरूरी नहीं कि वह हमेशा हमे प्राप्त हो। अप्राप्त चीजों का शोक कब तक मनाएंगे? देखा जाय तो सबकी जिंदगी कहीं न कहीं उलझी हुई है। इसे समझने और सुलझाने में काफी समय निकल जाता है। पर एक बात जो सत्य है वह ये कि जो हार नहीं मानता वह हालात को अपने अनुकूल बनाने में सफल हो सकता है। कभी कभी जान बूझ कर हालात से समझौता कर लेना भी आपके लिए बेहतर निर्णय हो सकता है। इसलिए परिस्थितियों के हिसाब से कभी कभी खुद समायोजित कर लेना भी आपको समझदार बनाता है। चिंता लेकर बैठ जाना और कुढ़ते रहना समस्या का हल नहीं है।
"आती हैं आएं विपदाएं,
लेकर अपनी दुस:ह व्यथाएं।
कै कै बार इसी धरती पर,
हमने तो सम्मान किया है।
हमने कब इनकार किया है।
आती हैं आएं विपदाएं।"
निराशा से संबंधित मैने बचपन में एक कविता पढ़ी थी जो प्रसिद्ध कवि मैथिली शरण गुप्त जी ने लिखा था।
कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रहकर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमे यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को
निराशा को दूर करने का उपाय
*अपेक्षाओं को कम करें*
यह स्मरण रहे की जीवन में हमेशा जीत ही नहीं मिलती, कभी कभी हार को भी मुस्कराते हुए गले लगाना पड़ता है। कोई ऐसा व्यक्ति नहीं जिसके जीवन में उतार चढाव न आया हो, इसलिए हर स्थिति मे सहज रहना जरूरी है। लेकिन इसका अर्थ यह बिलकुल नहीं होना चहिए कि आप अपने लिए उच्च लक्ष्य निर्धारित ही न करें। अपने लक्ष्य उच्च रखें परंतु दुर्भाग्यवश उन लक्ष्यों के प्राप्त न हो सकने पर अपने जीवन को रुकने न दें।
*हार से सीखने का प्रयत्न करें*
असफलता, सफलता के द्वार खोलती है। बस जरूरत है तो उससे सीख लेने की। चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए मानसिक मजबूती जरूरी है। ये मानसिक मजबूती अचानक से नहीं आ जाती, बल्कि हालात व्यक्ति को मजबूत बनाते हैं। निराशा का भाव असफलता और हार की वजह से जन्म लेता है। यहां हमे धैर्य की बहुत जरूरत होती है। जब भी हम असफल होते हैं तो हमे इसका विष्लेषण करना होता है। जो हमारी अगली तैयारी के लिए बेहतर मार्ग प्रशस्त करता है। क्या खेल में कोई टीम हर बार जीतती ही है? या पर्वतारोही ही हमेशा सफल होता है? है न? लेकिन पर्वत भी पर्वतारोही के हौसले के सामने नतमस्तक होता है।
प्रिय चीजों से जुड़ाव रखें
जब भी आप खराब पलों से गुजरें तो उन चीजों से जुड़े जो आपको खुशी और शकून देने वाली हों। निराशा हम इसलिए महसूस करते हैं क्योंकि कभी कभी हमे जीवन का कोई अर्थ नजर ही नहीं आता लेकिन जब हम अपनी पसंद की चीजों से जुड़ते हैं तो मन में एक सकारात्मक भाव पैदा होता है। आपकी पसंद में कोई अच्छी पुस्तक, जोश और उमंग से भरी कविताएं, कहानियां, फिल्म, कोई खेल, सफल लोगों की जीवनी या कुछ और भी हो सकती हैं।
अपने मित्रों और शुभेक्षुओं से जुड़े रहें
जब भी जीवन में निराश हों तो अपने सबसे करीबी और भरोसेमंद मित्रों, शुभेक्षुओं के साथ समय बिताने का प्रयत्न करें। अपनी परेशानी और अपने मन की बात साझा करें। निराश होने की स्थिति में जब आप खुद को दुनिया से अलग थलग कर लेते हैं तो आप सिर्फ अपने विचारों में ही कैद होकर रह जाते हैं। एक अच्छा मित्र हवा की ठंडे झोंके की तरह होता है। जब वह आपके साथ होता है तब आप बेहद रिलैक्स स्थिति महसूस करते हैं। एक अच्छा मित्र आपको गहरी निराशा से उबारने में आपकी बहुत मदद कर सकता है। अक्सर जब हम अपने परिवार के लोगों से अपनी कोई बात नहीं कह पाते तब एक मित्र हमारी मनोदशा को बेहतर तरीके से समझता है। उनसे अपनी व्यथा बतलाने मे हमे झिझक भी नहीं महसूस होती है।
अर्थात बहुत पहले की चिंता में अपना वर्तमान न खोएं। यदि आज ही हमने कल की चिंता में अपनी ऊर्जा नष्ट कर डाली तब आने वाले समय में हमारे लिए कुछ नहीं बचेगा। अर्थात जो बीत गया है वो अब दौर न आयेगा। फिर उसके बारे में क्या सोचना?
हां बीते समय की मधुर यादें हमे ऊर्जस्वित करती हैं और हमे प्रेरित भी करती हैं, इसलिए इन यादों को सहेजे रखना भी बहुत जरूरी है। ये यादें हमें निराशा के भंवर से निकाल कर आशा की किरण बन कर आती हैं।
सारांश
जीवन बहुत कीमती है। परिस्थितियां बनती और बिगड़ती रहती हैं। बड़े से बड़ा घाव भी समय के साथ भर जाता है। जब आप निराशा के दौर से गुजर रहे हों तो आपको कुछ चीजों जैसे हॉरर फिल्में देखना, पिछले बुरे दौर को याद करना, अकेले में रहने की आदत पालना, निराशावादी लोगों के बीच बैठना आदि से परहेज करना चाहिए। यह आपके अंदर भय का वातावरण तैयार करता है। स्वयं पर और अपने ईश्वर पर भरोसा रखें। समय पर सब ठीक होगा।
आपने मेरी पूरी पोस्ट को ध्यान से पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद।
सादर आभार





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