नशे की लत को कैसे रोकें

 नशा पर चर्चा करने से पहले लत पर बात कर लेना आवश्यक है। लत की समस्या मानसिक भी हो सकती है और व्यवहारगत भी, जो यदि प्रभावी हो गई तो किसी व्यक्ति को आजीवन परेशान करती है। इसमें किसी व्यक्ति का शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य, रिश्ते और करियर भी शामिल हो सकते हैं।






लत दो प्रकार के होते हैं

(1)व्यवहारगत संबंधी लत 

(2)पदार्थ उपयोग विकार संबंधी लत


(1) व्यवहारगत संबंधी लत

व्यवहारगत संबंधी लत किसी भी ऐसी गतिविधि से संबंधित हो सकता है जो किसी व्यक्ति के व्यवहार को परिलक्षित करता है यह उसके जीवन को जोखिम में तो डालता ही है साथ ही साथ समाज के अन्य लोग भी उसकी इस हरकत से परेशानी झेलते हैं।

व्यवहारगत संबंधी लत में ये शामिल होते हैं..

जुआ की लत

व्यायाम या डाइटिंग की लत

खाने की लत

खरीदारी की लत

दुकानों या घरों में चोरी की लत

सेक्स की लत

गंदी विडियोज देखने की लत

नेट पर गेमिंग की लत

मोबाइल पर घंटो समय बिताने की लत 

उपरोक्त के अतिरिक्त भी बहुत से ऐसे लत हैं जिन्हें हम लत मानने के लिए तैयार नहीं होते और कहीं न कहीं वे चीजें हमारे जीवन को प्रभावित करने का कार्य करती हैं।


 (2)पदार्थ उपयोग विकार संबंधी लत

इस प्रकार की लत व्यक्ति में मादक पदार्थों के सेवन के रूप में होती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाय तो आगे चलकर समस्या बहुत गंभीर हो सकती है।



इस प्रकार की लत में खाने, पीने, और सूंघने की चीजें शामिल होती हैं जिन्हें हम नशा के रूप में जानते हैं। इन चीजों में 

शराब

सिगरेट

भांग

गांजा

चरस

अफीम 

ब्राउन शुगर

मार्फीन 

तंबाकू

गुटखा

स्मैक

कोकीन

नशे के इंजेक्शन

नीद की दवाएं

कफ सीरप

और मानसिक उपचार में प्रयोग आने वाली कुछ दवाएं भी शामिल हैं।



मैं उस समय बहुत आश्चर्य चकित हुआ जब एक बेहद नामी स्कूल के बच्चों के बारे में पढ़ा की उस स्कूल के बच्चे रुमाल में कुछ रखकर सूंघते हैं। उस स्कूल में अधिकतर बेहद संभ्रांत परिवार के बच्चे अध्ययन करते हैं जिनमे अधिकारी, नेता, बड़े बड़े व्यवसाई और कारोबारी के बच्चे शामिल हैं।


नशे की लत के कारण

वास्तव में नशे की लत का कोई एक कारण नहीं है, बल्कि यह अलग अलग प्रकृति के लोगों पर अलग अलग तरह से प्रभावित करने वाले कारकों पर निर्भर करता है। नशे की लत एक दिन में भी नही लगती है। नशे की प्रवृत्ति कैसे बढ़ती है हम इस पर विस्तार से चर्चा करने वाले हैं।


आनुवंशिक कारण

कई अध्ययनों में पता चला है की यदि किसी के जैविक माता पिता भाई बहन यदि मादक पदार्थों के सेवन संबंधी विकार से पीड़ित हैं तो उनके बच्चों में भी यह विकार पनपने की संभावना बढ़ जाती है। वैज्ञानिक इस तरह के जीन का पता लगाने हेतु प्रयासरत हैं।


मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति/मनोवैज्ञानिक कारण

नशे की लत का मानसिक स्थिति से बहुत गहरा संबंध है। तनाव, चिन्ता, अवसाद, मानसिक आघात, क्रोध, बदले की भावना से नशे की लत में वृद्धि होती है। प्रेम में असफल व्यक्ति, धंधा, कारोबार में काफी नुकसान, नौकरी का छूटना, बेरोजगारी, रिश्तों का लंबे समय तक ठीक न रहना भी नशा को जन्म दे सकता है। इन समास्याओं में डूबे व्यक्ति आत्म चिकित्सा करने और अपने भावनात्मक दर्द से बचने के लिए कुछ दवाओं का सहारा ले सकते हैं। इससे नशे की लत का चक्र शुरू हो सकता है। क्योंकि वे अपने भावनात्मक संघर्षों से निपटने के लिए अपनी इच्छाशक्ति की जगह इन पदार्थों पर निर्भर रहना ज्यादा उपयुक्त पाते हैं।

कोई ऐसा व्यक्ति जो अंतर्मुखी हो, शर्मीला हो, अलग थलग रहने वाला हो, चुपचाप हो, हीनभावना से ग्रस्त हो, उपेक्षित हो, बात बात पर डांट पड़ती हो, उदास रहने वाली प्रवृत्ति का हो, इच्छाशक्ति की कमी हो तो ऐसे व्यक्ति नशे की तरफ उन्मुख हो सकते हैं। 


पर्यावरणीय कारक

मादक पदार्थों तक आसान पहुंच नशे के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। जैसे जिन स्थानों पर तंबाकू की खेती, कच्ची शराब बनाए जाने का धंधा, गांजा और भांग की खेती का कार्य लाइसेंस या बिना लाइसेंस के चल रहा हो उन छेत्रों में इन मादक पदार्थों के सेवन के अवसर बढ़ जाते है। इसके अतरिक्त यदि घर में इसका सेवन किसी बड़े व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है तो छोटों में भी इसके सेवन की प्रवृति बढ़ जाती है। घरों में प्रयोग होने वाली कुछ दवाओं का गलत उपयोग भी इस प्रकार के नशे की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता हैं।


मनोरंजन या शौक पालना भी है कारक

सभी ड्रग्स उपयोगकर्ता नशेड़ी नही होते। बल्कि कई लोग ड्रग्स के साथ एक प्रयोग भर करते हैं और जानना चाहते हैं की इसे लेने पर कैसा अनुभव होता है। युवाओं में नशे की लत विकसित हुए बिना ही इसे मात्र मनोरंजन के तौर पर आजमाया जाता है। साथियों के दबाव में या स्वेक्षा से कभी जब वे इस प्रकार के मादक पदार्थ प्रयोग करते हैं तो उनमें यह लत के रूप में विकसित हो सकता है। 



नशे का दुष्प्रभाव

कोई भी नशा हो वह केवल तभी तक सुखदाई होता है जब तक उसका असर रहता है। यह हमेशा अल्पकालिक होता है। नशे का असर उतरते ही व्यक्ति को पुनः उसी सुखद अनुभूति में जाने का मन करता है। और वह पुनः इसे प्राप्त करने का प्रयास करता है। धीरे धीरे यह प्रवृत्ति इतनी बढ़ जाती है की व्यक्ति इसके बिना रह ही नहीं पाता है। उसकी एक साथ कई समस्याएं बढ़ती जाती हैं।


 ध्यान केंद्रित न कर पाना

नशा करने वाला व्यक्ति हमेशा सुखद अनुभूति के आभास में जीना चाहता है। नशा उतरने के बाद उसका दिमाग पुनः इसे प्राप्त करने के लिए उसे उत्तेजित करता है। उसका दिमाग उसी को प्राप्त करने की चाह में यत्न करता है इसलिए वह चाह कर भी कहीं अन्यत्र केंद्रित नहीं हो पाता।



शारीरिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव

अलग अलग नशे का शारीरिक दुष्प्रभाव अलग अलग तरीके से पड़ता है किंतु एक बात जो सब में समाहित है वह यह कि कोई भी नशा अंततः आपके पूरे शरीर को बर्बाद कर देता है। शराब का सेवन आपके लीवर को, तंबाकू गुटखा का सेवन आपके दिल और मुंह को, गांजा भांग का नशा आपके मानसिक स्वास्थ्य को, इसी प्रकार से अन्य मादक पदार्थ आपके किसी न किसी अंगतंत्र को प्रभावित करते हैं। कैंसर और टीबी जैसी बीमारियां नशा करने वाले व्यक्ति मे तेजी से विस्तारित होती हैं।


चारित्रिक पतन

इसमें कोई संदेह नहीं की नशा करने वाला व्यक्ति सामाजिक रूप से बहुत अच्छे नजरिए से नहीं देखा जाता किंतु एक जो बड़ी बात है वह यह कि नशा व्यक्ति का चारित्रिक पतन तेजी से करता है। नशे में व्यक्ति का आत्म नियंत्रण खत्म हो जाता है। मानसिक पतन होने से उसके दिमाग में गंदी हरकतें जन्म लेती है। सोचने समझने की तात्कालिक क्षमता समाप्त हो जाती है। और वह नशे में कुछ ऐसे कार्य कर बैठता है जो उसके पूरे जीवन को बर्बाद कर देता है। अक्सर समाचार पत्रों में यह पढ़ने को मिल जाता है की अमुक व्यक्ति ने नशे में धुत्त होकर अपनी मां, बहन, चाची, भाभी या अन्य किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार किया। कई बार व्यक्ति नशे में अपने ही परिवार के लोगों की हत्या तक कर देता है। 


आर्थिक क्षति 

नशे का आदी व्यक्ति अपनी मति भंग कर बैठता है। उसे अच्छे और बुरे में अंतर नही महसूस होता या अगर होता भी है तो वह उसके बारे में अधिक विचार नहीं करना चाहता है। अक्सर घरों में नशेड़ी अपनी पत्नी या मां से जबरदस्ती पैसा मांगते हैं। उन्हें लगता है की जान बूझ कर उन्हे नहीं दिया जा रहा इसलिए वे दबाव बनाते हैं। सामान्य तरीके से नहीं मानने पर मारने पीटने की घटनाएं होती हैं। कई बार पत्नी या मां के गहनों पर भी नशेड़ियों की नजरें केंद्रित हो जाया करती हैं। कुछ ऐसी भी खंबरें कभी कभी अखबारों में मिल जाती हैं कि गहने न देने पर पत्नी या मां की हत्या कर दी। बच्चों की फीस भरना तो दूर यदि सरकारी धन जैसे वजीफा आदि उनके बैंक खाते में आ गया तो पैसा निकाल कर शराब पी जाया करते हैं। उनके घर का यह वातावरण बच्चों, बच्चियों को बहुत प्रभावित करता है। परिवार का एक नशेड़ी व्यक्ति पूरे परिवार के लिए कलंक जैसा हो जाता है। 


आत्म हत्या की प्रवृत्ति का पनपना

कई बार ऐसा होता है की व्यक्ति नशे में बिलकुल मजबूर होता है। उसे उस तात्कालिक क्षण पर नशा चाहिए ही चाहिए होता है। उसके अंदर आवेग इतना ज्यादा बढ़ गया होता है की वह भला बुरा से परे हो जाता है। किंतु नशा उतरने के पश्चात उसे कभी कभी आत्म ग्लानि जैसा महसूस होता है। जब उसकी आत्म ग्लानि उसके ऊपर इस कदर हावी हो जाती है कि उसके कारण उसके बच्चे, पत्नी, माता, पिता, भाई, बहन दादा, बाबा सब परेशान हैं तो वह खुद को जीवित रहने के लिए उपयुक्त नहीं पाता। उसे लगता है की वह परिवार में भार स्वरूप है। और उसके अंदर आत्म हत्या की प्रवृत्ति तेजी से विकसित होने लग जाती है। 


नशीली दवाओं के लत के लक्षण क्या हैं

नशीली दवाओं की लत के लक्षण में निम्नवत चीजें महसूस हो सकती हैं

कार्यस्थल पर समस्या

व्यक्तित्व में परिवर्तन

रिश्तों और सामाजिक जीवन में तनाव की स्थिति

निर्धारित दवा या पदार्थ के प्रति जुनून

अपनी पिछली रुचियों, शौक और गतिविधियों में कमी जिनमे व्यक्ति पहले आनंद लेता था।

चिड़चिड़ापन, 

मूड में उतार चढाव,

पसीना आना, 

ठंड लगना,

अस्वस्थता जैसे लक्षण 

ये लक्षण तब महसूस होते हैं जब व्यक्ति में नशीली दवा लेने की इच्छा कर रही होती है। दवा लेने के पश्चात वे सामान्य स्थिति में आ सकते हैं।


क्या लत को रोका जा सकता है?

जी, बिलकुल रोका जा सकता है। कुछ चीजों पर केंद्रित होकर लत को बहुत हद तक रोका जा सकता है।


शिक्षा और जागरूकता

नशीली दवाओं और अन्य मादक पदार्थों के सेवन को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। स्कूलों, समुदायों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के सहयोग से व्यक्तियों को नशीली दवाओं और अन्य मादक पदार्थों के उपयोग और उसके खतरों, लत की संभावना और शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य परिणामों के बारे में विस्तार से चर्चा करके उन्हें शिक्षित किया जा सकता है। घर के बड़े और समझदार लोगों को किशोरों और युवाओं के मामले में बिलकुल एक्टिव मोड में रहना चाहिए। कभी भी उनमें उपरोक्त लक्षण प्रतीत हों तो समय रहते रोगी मनोचिकित्सक अथवा मनोरोग विशेषज्ञ से बिना झिझक मिलकर सलाह लिया जा सकता है।


प्रारंभिक हस्तक्षेप 

मादक पदार्थों के सेवन के लक्षणों को पहचानना और प्रारंभिक हस्तक्षेप करके उपचार की दिशा में कदम बढ़ा देना सौ प्रतिशत उपचार की गारंटी देता है। यद्यपि उपचार के पश्चात कभी कभी पुनरावृत्ति संभव है किंतु  लगातार प्रयास से इसमें पूर्ण सफलता मिल सकती है। जितनी जल्दी किसी व्यक्ति को उसकी लत को छुड़ाने के लिए प्रयास शुरू होता है, उसकी लत छूटने की संभावना में उतनी ही शीघ्रता होती है।


स्वस्थ जीवन शैली अपनाना

संतुलित जीवन शैली व्यक्ति को पूर्ण बनाता है। एक ऐसी जीवन शैली जिसमे समुचित आहार विहार, और व्यवहार की जगह हो। रात्रि में समय से दस बजे तक सो जाना, सुबह शीघ्रता से उठना, टहलना, योग, प्राणायाम और ध्यान की क्रिया व्यक्ति के अंदर विकार को पनपने से रकते हैं। शाकाहार और संतुलित भोजन आपको मानसिक विकारों से बचाता है। 






घर का माहौल मैत्रीपूर्ण हो

घर में एक ऐसा वातावरण तैयार हो जहां सभी लोग एक साथ भोजन कर सकें। हंसी और ठहाकों की गुंजाइश हो। संवाद भी जरूरी है। जब घर में विपरीत परिस्थिति हो तब एक दूसरे की सहयोग भावना हो। विचार खुले हों जहां कोई भी किशोर, युवा अथवा अन्य कोई भी व्यक्ति आपने विचार रख सके और प्रिक्षा कर सके। ध्यान रखें यदि किसी व्यक्ति को किसी मादक पदार्थ चाहे वह पीने से संबंधित हो अथवा खाने से, की लत लग रही हो तो वहां आपको बेहद सावधानी से उससे इस प्रकार की नैतिक बात करनी है कि बात सीधे उसके दिल पर लगे और उसे अपने द्वारा की जा रही गलती का पछतावा हो। आपकी बातें उसे मोरल सपोर्ट करती हैं और उसके अंदर इच्छाशक्ति बढ़ती है। यदि समस्या मनोचिकित्सक अथवा डॉक्टर के स्तर तक पहुंच चुकी है तब भी ऐसे व्यक्ति को बिना क्रोध किए उपचार दिलाना जरूरी है। 




लत की समस्या रातों रात हल नही होती

एक चीज ध्यान देने वाली है कि कोई भी लत की समस्या रातों रात हल नहीं हो जाती, इसमें समय लगता है। परिवार के अन्य सदस्यों में चाहे वह पिता, पुत्र, पत्नी, मां भाई, बहन कोई भी हो या इसमें से किसी को भी यह समस्या है तो अन्य सदस्यों को धैर्य रखने की सलाह दी जाती है। लती व्यक्ति को अलग थलग छोड़ देना समस्या को बढ़ाने जैसा है। आपका धैर्य उसकी मदद करने में सहायता करेगा। पीड़ित व्यक्ति से लगातार संपर्क में रहना, उससे बातें करना, उसे किसी न किसी कार्य में व्यस्त रखना, मनोरंजन की सामग्री जैसे टेलीविजन पर हास्य फिल्में देखना, पसंद का संगीत सुनना समस्या के शीघ्र समाधान में तेजी से मदद करता है।


सारांश

नशा एक पारिवारिक और सामाजिक समस्या है। नशे की लत लगने के पीछे कोई एक निश्चित कारण नहीं है। नशा का उन्मूलन रातों रात संभव नहीं है। नशे की लत पूरी तरह से ठीक की जा सकती है। परिवार और समुदाय के सहयोग से, शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के बीच जागरूकता लाकर इसको रोका जा सकता है। नशे का लती भी समाज और परिवार का हिस्सा है। उसको भी समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए परिवार, समुदाय और चिकित्सक की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। निरंतर प्रयास और धैर्य से एक नशे का आदी व्यक्ति पूरी तरह से ठीक हो सकता है। जरूरत है तो इच्छाशक्ति की।

आपने पूरे पेज को ध्यान से पढ़ा आपका धन्यवाद। उम्मीद है कि आपके घर परिवार, रिश्तेदार, मित्रों या आपके आसपास इस तरह के व्यक्ति होंगे तो उन्हे सही दिशा में आपका मार्गदर्शन प्राप्त होगा। 

सादर आभार





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